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Rabu, 29 Juni 2011

30 जून से चवन्नी को चलन से बाहर कर दिया जायेगा |

एक वक़्त था जब चवन्नी सिर्फ एक सिक्का नहीं हुवा करती थी बल्कि चवन्नी हमारी ज़िन्दगी का एक अहम् हिस्सा हुवा करती थी |मंदिर में पूजा के बाद पंडित जी को दक्षिणा में सवा रुपया दिया जाता था|
चवन्नी की कीमत हमारे लिए सिर्फ एक सिक्के भर की नहीं थी बल्कि चवन्नी तो हरे दिलो दिमाग में बस्ती थी 
मां अपने बच्चो को चवन्नी की ढलवा ताबीज बना के पहनाती थी ,बुरी नज़र और बुरे सपनो से बचने के लिए |
शाम को जब पिता जी दफ्तर से घर आते थे और बच्चे उनसे टॉफी खरीदने के लिए पईसा मांगते थे तो उनके हाथो   में खनकती चवन्नी होती थी |
एक वक़्त था जब गर्मी के दिनों में भरी दोपहरी में बरफ वाला अपने साईकिल में पो पो बजता हुवा बर्फ के गोले बेचने आता था तब हमरे हाथो में चवन्नी हुवा करती थी जिससे हम बर्फ के गोले खरीद के खाते थे |
उन दिनों स्कूल के बाहर एक चवन्नी में एक प्लेट पकौड़े मिला करते थे|
चवन्नी नहीं होती तो किशोर कुमार ‘पांच रुपैया बारह आना ...’ नहीं गा पाते और ‘राजा दिल मांगे चवन्नी उछाल के’, भी लोग नहीं गुनगुना पाते|
रिजर्व बैंक का आदेश जारी हो चुका है। कल से यानि 30 जून से चवन्नी को चलन से बाहर कर दिया जायेगा | सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सभी बैंकों में चवन्नी और उससे छोटे सिक्कों को देकर बदले में बराबर मूल्य के रुपए लिए जा सकते हैं। इसके अलावा रिजर्व बैंक की सभी शाखाओं में भी यह सुविधा रहेगी।



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Kamis, 16 Juni 2011

गुड़गांव में चलेगी बिना ड्राइवर वाली टैक्सी |

गुड़गांव में जल्दी ही ऐसी टैक्सी चलती फिरती दिखाई देगी जिसमें ड्राइवर नहीं होगा। इस टैक्सी में बैठकर सवारी करते हुए आपको ट्रैफिक जाम का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। अच्छी बात ये है कि ये बिल्कुल पॉल्यूशन फ्री होगी। साथ ही इसमें सफर करते हुए आपके समय की बचत भी होगी क्योंकि इस टैक्सी से सिर्फ 10 रुपए में 30 मिनट का सफर 10 मिनट में तय किया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि पॉड टैक्सी में सफर करते हुए ना तो आपको रेड सिग्नल मिलेगा और ना ही ट्रैफिक जाम।
इस तरह की टैक्सी अब तक सिर्फ लंदन में चलती है। इसे पॉड टैक्सी कहा जाता है। लेकिन अब हरियाणा सरकार इस तरह की पॉड टैक्सी को गुड़गांव में चलाने का मन बना रही है। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट पर करीब 5000 करोड़ की लागत आएगी। उम्मीद की जा रही है कि अगले 3-4 सालों में गुड़गांव में पॉड टैक्सी सर्विस शुरू हो जाएगी।

इस टैक्सी में पेट्रोल डीजल की जरूरत नहीं पड़ती है, ये चार्जेबल बैटरी से चलती है। और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए किसी ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती है। क्योंकि ये कंप्यूटर प्रोग्राम के माध्यम से चलती है। इस टैक्सी में बैठने के बाद मुसाफिरों को इसमें लगे ‘टचस्क्रीन’ पर केवल उस जगह का नाम टाइप करना होता है जहां उन्हे जाना है। तय स्टेशन आते ही टैक्सी रुक जाती है और इसका दरवाजा अपने आप खुल जाता है। इस अत्याधुनिक टैक्सी में एक साथ 4 लोग सफर कर सकते हैं। लेकिन इसे चलाने के लिए खास ट्रैक की जरूरत पड़ती है। इसकी अधिकतम रफ्तार 21 मील प्रति घंटा है।


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मुर्गी पहले आई या अंडा, सुलझ गई है पहेली |

पहले अंडा आया या मुर्गी ? 


यह प्रश्न हजारों वर्षों से लोगों को परेशान करता आया है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस यक्ष प्रश्न का जवाब ढूंढ़ निकालने का दावा किया है।


शेफील्ड और वारविक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक दल ने दावा किया है कि धरती पर अंडे से पहले मुर्गी का जन्म हुआ था। वैज्ञानिकों ने पाया कि ओवोक्लाइडिन नाम का प्रोटीन अंडे के खोल के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने बताया कि यह प्रोटीन मुर्गी के अंडाशय से पैदा होता है इसलिये पहले अंडा आया या मुर्गी अब यह पहेली सुलझ गई है। वैज्ञानिकों ने कहा कि पहले मुर्गी आई और इसके बाद अंडा पैदा हुआ।


शोध से जुडे़ प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. कोलिन फ्रीमैन ने कहा, 'लंबे समय से यह संदेह बना हुआ था कि अंडा पहले आया लेकिन अब हमारे पास वैज्ञानिक सबूत है जो हमें बताता है कि मुर्गी पहले आई।'


डेली एक्सप्रेस के मुताबिक रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि प्रोटीन पैदा करने वाली मुर्गियां पहले कैसे आईं?

श्रोत- navbharattimes

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Sabtu, 11 Juni 2011

भारत के परमाणु रियेक्टर एक नजर में |

एक मोटे अनुमान के मुताबिक अगले 40 साल में भारत की परमाणु बिजली उत्पादन की क्षमता 100 गुना तक बढ़ सकती है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो 2050 तक देश में 4,70,000 मेगावाट परमाणु बिजली पैदा हो सकती है। इस समय देश में 4560 मेगावाट परमाणु बिजली पैदा हो रही है।
परमाणु बिजली के पक्ष में एक बड़ा तर्क यह है यह परंपरागत ईंधन से बनाई गई बिजली से सस्ती होगी। एनपीसीआईएल की दरों को देखें परमाणु बिजली के सस्ते होने के संकेत मिलते हैं। पारंपरिक ईंधन से बनाई गई बिजली कई राज्यों में चार से पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से बिक रही है। जबकि एनपीसीआईएल के विभिन्न रियेक्टरों से हासिल बिजली की औसत कीमत 2.40 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है।


लेकिन जापान के फुकुशिमा के न्यूक्लियर रियेक्टरों में जो कुछ हुवा उसको देख के एसा लगता है की ये न्यूक्लियर रिएक्टर विकास के लिए नहीं बल्कि विनाश के लिए है |
भारत के परमाणु रियेक्टर---


हरियाणा :  700 मेगावाट के 4 रियेक्टर (प्रस्तावित)
यूपी (नरौरा) :  220 मेगावाट के 2 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
पश्चिम बंगाल (हरिपुर) :  1000 मेगावाट के 6 रियेक्टर ( प्रस्तावित)
मध्यप्रदेश :  700 मेगावाट के दो रियेक्टर (प्रस्तावित )
आंध्रप्रदेश (कवड्डा) :  1000 मेगावाट के 6 रियेक्टर
तमिलनाडु (कलपक्कम) :  200 मेगावाट के 2 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
तलिनाडु (कुडनकुलम) :  1000 मेगावाट के 2 रियेक्टर (काम शुरू)
1000 मेगावाट के 4 रियेक्टर ( उत्पादन जारी)
कर्नाटक (कैगा) :  220 मेगावाट के 4 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
महाराष्ट्र (जैतापुर) : 1650 के 6 रियेक्टर (प्रस्तावित)
तारापुर :  160 मेगावाट के 2 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
540 मेगावाट के 2 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
गुजरात (मिठीविरदी) :  1000 मेगावाट के 6 रियेक्टर ( प्रस्तावित)
काकरापार :  220 मेगावाट के 2 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
700 मेगावाट के 2 रियेक्टर (2010 में लांच परियोजना)
राजस्थान (रावतभाटा) :  100 मेगावाट का 1 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
200 मेगावाट का 1 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
200 मेगावाट के 4 रियेक्टर (उत्पादन जारी)
700 मेगावाट के 2 रियेक्टर (2010 में लांच परियोजना)



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Kamis, 09 Juni 2011

लैपटॉप, कीमत सिर्फ 2,200 रु |

इस महीने के आखिर में ऐसे 10,000 लैपटॉप आईआईटी राजस्थान को दिए जाएंगे। अगले चार महीनों में ऐसे 90,000 और लैपटॉप शिक्षण संस्थाओं में भेजे जाएंगे। इनकी कीमत होगी महज 2,200 रुपए।
बुधवार को शिक्षा मंत्रियों की बैठक में इस बात की घोषणा की गई थी।मानव संसाधन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि एक लाख लैपटॉप तैयार हो चुके हैं। इसमें से हर राज्य को तीन तीन हजार लैप टॉप दिए जाएंगे। केन्द्र सरकार इन पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है।
इसका मतलब यह हुआ कि हर छात्र को इसके लिए सिर्फ 1100 रुपए देने होंगे।पहले यह तय हुआ था कि ये लैपटॉप सिर्फ 1500 रुपए में दिए जाएंगे लेकिन महंगाई बढ़ने से इनकी कीमतें बढ़कर 2200 रुपए हो गईं। सरकारी सूत्रों ने बताया कि अगर ज्यादा बिक्री हुई तो दाम गिराकर फिर से 1500 रुपए कर दिया जाएगा।इस लैपट़ाप का स्क्रीन सात इंच का है। इसमें दो यूएसबी पोर्ट हैं और इसकी बैटरी तीन घंटे चलती है और इसका मेमरी सपोर्ट 16 जीबी का है।

श्रोत-- business.bhaskar.com


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Rabu, 08 Juni 2011

मोबाइल से बुकिंग और एमएमएस से रेल टिकट पाएं |

हिन्दुस्तान, बुधवार, 08 जून, 2011

रेल टिकट लेने के लिए बुकिंग काउंटर पर घंटों लाइन में खड़े रहना जल्द ही बीते जमाने की बात हो जाएगी। ई-टिकट के बाद रेलवे मोबाइल से टिकट बुक कराने की सुविधा शुरू करने जा रहा है। यह सेवा जुलाई से शुरू होने की संभावना है। रेल यात्रि  घर बैठे अपने स्मार्ट मोबाइल से रेल टिकट बुक करा सकेंगे|


खास बात यह है कि रेलवे की ओर से एमएमएस के जरिए यात्री के मोबाइल पर रेल टिकट का इमेज भेजेगा।
मोबाइल स्क्रीन पर टिकट का इमेज ही यात्रा के लिए वैध माना जाएगा, टिकट का प्रिंट लेने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन सफर के दौरान यात्री को अपने साथ आईडी प्रूफ साथ रखना होगा। रेल मंत्रलय अधिकारियों ने बताया कि मोबाइल से टिकट बुक कराने के लिए आईआरसीटीसी (इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म) की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। विभाग की ओर से एक आईडी व पासवर्ड जारी किया जाएगा। इसके पश्चात यात्राी अपने मोबाइल पर आईआरसीटीसी की वेबसाइट से एडवांस टिकट बुक करा सकेंगे। मोबाइल स्क्रीन पर टिकट बुकिंग-आईकॉन पर जाकर ऑनलाइन फॅार्म भरना होगा। इसमें अपना नाम, पता, ट्रेन नंबर, रिजर्वेशन क्लास, यात्रा की तारीख, मोबाइल नंबर आदि जरूरी जानकारी देनी होगी। इस सुविधा के लिए स्मार्ट मोबाइल होना जरूरी है जिसमें इंटरनेट हो। स्मार्ट मोबाइल धारक अपने रिश्तेदार की टिकट बुक कर सकेंगे। यात्री डेबिट, क्रेडिट या कैश कार्ड से टिकट का भुगतान कर सकेंगे। मोबाइल टिकटिंग के अलावा मोबाइल स्क्रीन पर ट्रेनों का रूट, किराया, बर्थ उपलब्धता आदि की जानकारी भी उपलब्ध रहेगी। मोबाइल टिकटिंग के लिए प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों से रेलवे का समझौता हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि भुगतान प्रक्रिया की तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है|

ये पोस्ट "livehindustan.com" से लिया गया है | 

इस पोस्ट को यहाँ पुब्लिश करने का मकसद जानकारी बाँटना है |
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Selasa, 17 Mei 2011

बरमूडा त्रिकोण जिसे दानवी त्रिकोण भी कहा जाता है|

बरमूडा त्रिकोण( Bermuda Triangle ) अटलांटिक महासागर का वो भाग है, जिसे दानवी त्रिकोण / शैतानी त्रिभुज / मौत के त्रिकोण / भुतहा त्रिकोण ( डेविल्‍स ट्राइएंगल ) भी कहा जाता है क्योकि वर्ष 1854 से इस क्षेत्र में कुछ ऐसी घटनाऍं / दुर्घटनाऍं घटित होती रही हैं। यह एक रहस्यमयी जलक्षेत्र जो उत्‍तरी अटलांटिक महासागर में स्थित है,
जिसकी गुत्थी आज तक कोई नहीं सुलझा सका है। यहाँ अब तक सैकड़ों - हजारों की संख्या में विमान, पानी के जहाज़ तथा व्यक्ति गये और संदिग्‍ध रूप से लापता हो गये और लाख कोशिशों के बाद भी उनका पता नहीं लगाया जा सका है। ऐसा कभी-कभार नहीं, बल्कि कई बार हो चुका है। यही वह कारण है कि आज भी इसके आस-पास से गुजरने वाले जहाजों और वायुयानों के चालक दल के सदस्‍य व यात्री सिहर उठते हैं। सैकडॊं वर्षों से यह त्रिकोण वैज्ञानिकों, इतिहासकर्ताओं और खोजकर्ताओं के लिए भी एक बड़ा रहस्‍य बना हुआ है।
अटलांटिक महासागर के इस भाग में जहाजों और वायुयानों के गायब होने की जो घटनाएं अब तक हुई हैं उनमें पाया गया है कि जब भी कोई जहाज़ या वायुयान यहां पहुंचता है, उसके राडार, रेडियो वायरलेस और कम्पास जैसे यन्त्र या तो ठीक से काम नहीं करते या फिर धीरे-धीरे काम करना ही बन्द कर देते हैं। जिस से इन जहाजों और वायुयानों का शेष विश्व से संपर्क टूट जाता है। उनके अपने दिशासूचक यन्त्र भी खराब हो जाते हैं। इस प्रकार ये अपना मार्ग भटक कर या तो किसी दुघर्टना का शिकार हो जाते हैं या फिर इस रहस्यमय क्षेत्र में कहीं गुम होकर इसके रहस्य को और भी अधिक गहरा देते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में भौतिक के कुछ नियम बदल जाते हैं, जिस कारण ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं। कुछ लोग इसे किसी परालौकिक ताकत की करामात मानते हैं, तो कुछ को यह सामान्य घटनाक्रम लग रहा है। यह विषय कितना रोचक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस पर कई किताबें और लेख लिखे जाने के साथ ही फ़िल्में भी बन चुकी हैं। तमाम तरह के शोध भी हुए लेकिन तमाम शोध और जांच - पड़ताल के बाद भी इस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है कि आखिर गायब हुए जहाजों का पता क्यों नहीं लग पाया, उन्हें आसमान निगल गया या समुद्र लील गया, दुर्घटना की स्थिति में भी मलबा तो मिलता, लेकिन जहाजों और विमानों का मलबा तक नहीं मिला ।
बरमूदा त्रिकोण के संबन्द्ध में सबसे अधिक रहस्यमयी घटना को `मैरी सैलेस्ट´ नामक जहाज़ के साथ जोड़ कर देखा जाता है। 5 नवम्बर, 1872 को यह जहाज़ न्यूयॉर्क से जिनोआ के लिए चला, लेकिन वहां कभी नहीं पहुंच पाया। बाद में ठीक एक माह के उपरान्त 5 दिसम्बर, 1872 को यह जहाज़ अटलांटिक महासागर में सही-सलामत हालत में मिला, परन्तु इस पर एक भी व्यक्ति नहीं था। अन्दर खाने की मेज सजी हुई थी, किन्तु खाने वाला कोई न था। इस पर सवार सभी व्यक्ति कहां चले गये ? खाने की मेज किसने, कब और क्यों लगाई ? ये सभी सवाल आज तक एक अनसुलझी पहेली ही बने हुए हैं।

वैज्ञानिकों ने इसके पीछे ऐसे कारण बताए हैं जो इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। ये कारण इस प्रकार हैं ---

मीथेन गैस
कुछ रसायन शास्त्रियों क मत है कि उस क्षेत्र में 'मीथेन हाइड्रेट' नामक रसायन इन दुर्घटनाओं का कारण है। समुद्र में बनने वाला यह हाइड्राइट जब अचानक ही फटता है, तो अपने आसपास के सभी जहाजों को चपेट में ले सकता है। यदि इसका क्षेत्रफल काफ़ी बड़ा हो, तो यह बड़े से बडे जहाज़ को डुबो भी सकता है।

चुम्बकीय क्षेत्र
बहुत से विद्वानों का मत है कि सागर के इस भाग में एक शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र होने के कारण जहाजों में लगे उपकरण यहाँ काम करना बंद कर देते हैं तथा रेडियो तरंगों के संकेतों को काट कर इन यन्त्रों को खराब कर देता है इससे जहाज़ रास्ता भटक जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

परग्रही
इसका रहस्य तब और भी अधिक गहरा हो जाता है जब कुछ लोग इन दुर्घटनाओं को परग्रही शक्तितियों और `उड़नतश्तरियों´ से जोड़ कर देखते हैं ।

और कई दूसरे कारण
कुछ लोग इन घटनाओं को संयोग मानते हैं, परन्तु इतने सारे जहाजों और वायुयानों का केवल इस विशेष त्रिभुजाकार क्षेत्र में ही गायब होना मात्र संयोग नहीं हो सकता। जबकि कुछ वैज्ञानिक इन दुघर्टनाओं का कारण गुरुत्वाकर्षण की शक्ति बताते हैं। कुछ लोग इन घटनाओं को प्राकृति बताते हुए समुद्र के इस भाग के नीचे स्थित स्फटिक पदार्थों, जलचक्रों (भंवरों), समुद्री तल से उत्पन्न समुद्री भूचालों को इनका दोषी मानते हैं तथा बहुत से ऐसे व्यक्ति हैं जिनका मानना है कि ये दुर्घटनाएं मशीनी खराबी मात्र ही हैं।

आखिर कहां पर है बारमूडा-----------
बरमूडा उत्तर अटलांटिक महासागर में स्थित ब्रिटेन का प्रवासी क्षेत्र है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट पर मियामी (फ्लोरिडा) से सिर्फ़ 1770 किलोमीटर और हैलिफैक्स, नोवा स्कोटिया (कनाडा) के दक्षिण में 1350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह सबसे पुराना और सबसे अधिक जनसंख्या वाला ब्रिटेन का प्रवासी क्षेत्र है।


इस दानवी त्रिभुज के बारे में कहा जाता है कि जो यहां गया वापस न आ सका। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां गायब होने वाले जहाजों को ढूंढ़ पाना भी आसान नहीं होता। इस इलाके में गायब होने वाले जहाजों का कोई अता-पता नहीं चलता। यही कारण है कि बहुत से जहाजों व विमानों के गायब होने का कोई लिखित ब्यौरा भी नहीं है। दर्ज किए गए ब्यौरे के अनुसार इस इलाके में 125 वायुयान और क़रीब 50 जहाज़ डूब चुके हैं।


श्रोत----इस पोस्ट को यहाँ से लिया गया है |  



Sabtu, 19 Maret 2011

भारत में कहां है 'भूकंप' का सबसे ज्यादा 'खौफ'|

स्रोत-12/03/11 दैनिक भास्कर 

भूकंप का खतरा देश में हर जगह अलग-अलग है। इस खतरे के हिसाब से देश को चार हिस्सों में बांटा गया है जैसे जोन-2, जोन-3, जोन-4 तथा जोन-5। सबसे कम खतरे वाला जोन 2 है तथा सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन-5 है।

नार्थ-ईस्ट के सभी राज्य, जम्मू-कश्मीर, उतराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से जोन-5 में आते हैं। उतराखंड के कम ऊंचाई वाले हिस्सों से लेकर उतर प्रदेश के ज्यादातर हिस्से, दिल्ली जोन-4 में आते हैं।

मध्य भारत अपेक्षाकृत कम खतरे वाले हिस्से जोन-3 में आता है, जबकि दक्षिण के ज्यादातर हिस्से सीमित खतरे वाले जोन-2 में आते हैं, लेकिन यह एक मोटा वर्गीकरण है। दिल्ली में कुछ इलाके हैं जो जोन-5 की तरह खतरे वाले हो सकते हैं।

इस प्रकार दक्षिण राज्यों में कई स्थान ऐसे हो सकते हैं जो जोन-4 या जोन-5 जैसे खतरे वाले हो सकते हैं। दूसरे जोन-5 में भी कुछ इलाके हो सकते हैं जहां भूकंप का खतरा बहुत कम हो और वे जोन-2 की तरह कम खतरे वाले हों। इसके लिए भूकंपीय माइक्रोजोनेशन की जरूरत होती है।

माइक्रोजोनेशन वह प्रक्रिया है जिसमें भवनों के पास की मिट्टी को लेकर परीक्षण किया जाता है और इसका पता लगाया जाता है कि वहां भूकंप का खतरा कितना है।


विभिन्न रिक्टर स्केलों पर भूकंप  


>रिक्टर स्केल के अनुसार 2.0 की तीव्रता से कम वाले भूकंपीय झटकों की संख्या रोजाना लगभग आठ हजार होती है जो इंसान को महसूस ही नहीं होते।

>2.0 से लेकर 2.9 की तीव्रता वाले लगभग एक हजार झटके रोजाना दर्ज किए जाते हैं, लेकिन आम तौर पर ये भी महसूस नहीं होते।

>रिक्टर स्केल पर 3.0 से लेकर 3.9 की तीव्रता वाले भूकंपीय झटके साल में लगभग 49 हजार बार दर्ज किए जाते हैं, जो अक्सर महसूस नहीं होते, लेकिन कभी-कभार ये नुकसान कर देते हैं।

>4.0 से 4.9 की तीव्रता वाले भूकंप साल में लगभग 6200 बार दर्ज किए जाते हैं। इस वेग वाले भूकंप से थरथराहट महसूस होती है और कई बार नुकसान भी हो जाता है।

>5.0 से 5.9 तक का भूकंप एक छोटे क्षेत्र में स्थित कमजोर मकानों को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाता है जो साल में लगभग 800 बार महसूस होता है।

>6.0 से 6.9 तक की तीव्रता वाला भूकंप साल में लगभग 120 बार दर्ज किया जाता है और यह 160 किलोमीटर तक के दायरे में काफी घातक साबित हो सकता है।

>7.0 से लेकर 7.9 तक की तीव्रता का भूकंप एक बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है और जो एक साल में लगभग 18 बार दर्ज किया जाता है।

>रिक्टर स्केल पर 8.0 से लेकर 8.9 तक की तीव्रता वाला भूकंपीय झटका सैकड़ों किलोमीटर के क्षेत्र में भीषण तबाही मचा सकता है जो साल में एकाध बार महसूस होता है।

>9.0 से लेकर 9.9 तक के पैमाने का भूकंप हजारों किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही मचा सकता है, जो 20 साल में लगभग एक बार आता है। दूसरी ओर 10.0 या इससे अधिक का भूकंप आज तक महसूस नहीं किया गया।


मूल समाचार{लेख}के लिए यहाँ क्लिक करें |

Senin, 07 Februari 2011

अपने मोबाइल पर रोज़ फ्री SMS के लिए अपने मोबाइल में.....????????


मस्ती और हंगामे की दुनिया में आप का स्वागत है|

अगर आप अपने दोस्तों को रोज़ SMS करते है तो आज ही सबसक्रयिब कीजिये NAI_BAAT 
इस ग्रुप को ज्वाइन करने के बाद आप के मोबाइल पर रोज़ 3 लव,दोस्ती और संता बनता टाइप sms भेजा जायेगा वो भी फ्री में कोई शुल्क नहीं लगेगा कभी भी किसी भी SMS का |


अपने मोबाइल पर रोज़ फ्री SMS के लिए अपने मोबाइल में टाइप करें ON NAI_BAAT और भेज दें 9870807070 पर| 

इस ग्रुप में भेजे जाने वाले कुछ  SMS 

Being a friend is not just sharing a joke, a conversation, a cup of coffee or a funny story.It means sharing an honest and true part of yourself.

When does a friend become a best friend?
When his dialouge, "I care for you" converts into "I will kill you if you don't care for me"

Science has proved that sugar melts in water,so plz don't walk in the rain,
otherwise I may lose a sweet friend like u!!


Sweetness can be
defined without honey.
Fragnance can be
defined without Rose.
But, friendship can't be
defined without यू

Teri dosti me khud
ko mehfuz mante
hai,Teri dosti k saye me zinda
hai hum'Tujhe khuda ka diya huwa taabiz mante hai hum.

Zameen thi meri
aasman uska tha,
jiske liye ki thi sab se
bagawat maine,
Mere hi khilaf har 1
ilzaam uska tha.

Boy: I am not rich like rohit, I don't even have a bid car like rohit. But I really love you!
Girl: I love you too, but tell me more about rohit.. 

Patient to Doc: Aapne nurse bahut achhi rakhi hai, uska haath lagte hi main theek ho gaya.
Doctor: Jaanta hu, thappad ki awaaz mujhe bhi sunai di thi. 


Rabu, 27 Oktober 2010

गणित के कुछ रोचक तथा मज़ेदार तथ्य |


Numeric Palindrome with 1's
1 x 1 = 1
11 x 11 = 121
111 x 111 = 12321
1111 x 1111 = 1234321
11111 x 11111 = 123454321
111111 x 111111 = 12345654321
1111111 x 1111111 = 1234567654321
11111111 x 11111111 = 123456787654321
111111111 x 111111111 = 12345678987654321


Sequential Inputs of numbers with 8
1 x 8 + 1 = 9
12 x 8 + 2 = 98
123 x 8 + 3 = 987
1234 x 8 + 4 = 9876
12345 x 8 + 5 = 98765
123456 x 8 + 6 = 987654
1234567 x 8 + 7 = 9876543
12345678 x 8 + 8 = 98765432
123456789 x 8 + 9 = 987654321


Sequential 1's with 9
1 x 9 + 2 = 11
12 x 9 + 3 = 111
123 x 9 + 4 = 1111
1234 x 9 + 5 = 11111
12345 x 9 + 6 = 111111
123456 x 9 + 7 = 1111111
1234567 x 9 + 8 = 11111111
12345678 x 9 + 9 = 111111111
123456789 x 9 + 10 = 1111111111


Sequential 8's with 9
9 x 9 + 7 = 88
98 x 9 + 6 = 888
987 x 9 + 5 = 8888
9876 x 9 + 4 = 88888
98765 x 9 + 3 = 888888
987654 x 9 + 2 = 8888888
9876543 x 9 + 1 = 88888888
98765432 x 9 + 0 = 888888888


Without 8
12345679 x 9 = 111111111
12345679 x 18 = 222222222
12345679 x 27 = 333333333
12345679 x 36 = 444444444
12345679 x 45 = 555555555
12345679 x 54 = 666666666
12345679 x 63 = 777777777
12345679 x 72 = 888888888
12345679 x 81 = 999999999


Sequential Inputs of 9
9 x 9 = 81
99 x 99 = 9801
999 x 999 = 998001
9999 x 9999 = 99980001
99999 x 99999 = 9999800001
999999 x 999999 = 999998000001
9999999 x 9999999 = 99999980000001
99999999 x 99999999 = 9999999800000001
999999999 x 999999999 = 999999998000000001


Sequential Inputs of 6
6 x 7 = 42
66 x 67 = 4422
666 x 667 = 444222
6666 x 6667 = 44442222
66666 x 66667 = 4444422222
666666 x 666667 = 444444222222
6666666 x 6666667 = 44444442222222
66666666 x 66666667 = 4444444422222222
666666666 x 666666667 = 444444444222222222

Jumat, 10 September 2010

आप सब को ईद मुबारक |




आप सब को ईद की बहुत बहुत मुबारक बाद |
अल्लाह करे आप सब की ज़िन्दगी में ख़ुशी हमेशा बनी रहे {आमीन}


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